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Tuesday, December 20, 2011

आईपी यूनिवर्सिटी के भ्रष्ट सेक्सन ऑफिसर शरद कुमार को जेल!

नगर संवाददाता ॥ तीस हजारी, बीएड में दाखिले के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में आईपीयूनिवर्सिटी के सेक्शन अफसर शरद कुमार को अदालत नेढाई साल कैद की सजा सुनाई है। अडिशनल सेशन जज बी .आर . केडिया की अदालत ने दोषी पर 20,000 रुपये काजुर्माना भी किया है। उसे एंटी करप्शन ने 16 जुलाई 2004को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तारकिया था। 

पेश मामले के मुताबिक गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटीमें जुलाई 2004 में बीएड में दाखिले के लिए एंट्रेस एग्जामथा। यूनिवर्सिटी ने 2600 रैंक तक के स्टूडेंट्स को काउंसलिंगके लिए बुलाया था। इन्हीं उम्मीदवारों में मोना चौधरी भी शामिल थीं। उनका रैंक 2033 वां था। 12 जुलाई 2004 कोमोना अपने भाई मुकेश चौधरी के साथ यूनिवर्सिटी गई थीं।वे बीएड के एडमिशन को डील करने वाले सेक्शन अफसर शरद कुमार से मिले। शरद कुमार ने उन्हें 15 जुलाई को बुलाया। मुकेश अपनी बहन के साथ 15 जुलाई को शरदकुमार से जाकर मिले। तब उन्हें बताया गया कि बीएड में एडमिशन की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। 
मुकेश ने उस अधिकारी से कहा कि यह उनकी बहन के भविष्य का सवाल है। तब शरद कुमार ने उन्हंे दो दिन बाद आने के लिए कहा। मुकेश अपने दोस्त कर्मशील के साथ 16 जुलाई 2004 की सुबह एक बार फिर शरद कुमार से मिला। तब उन्होंने बीएड मंे दाखिला कराने की एवज मंे उनसे 1.25 लाख रुपये मांगे। मामला एकलाख रुपये में तय हुआ। मुकेश यह कहकर वहां से चला आया कि इतने कम समय में वह इतनी बड़ी रकम काजुगाड़ नहीं कर पाएगा। तब अधिकारी ने उनसेे रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20,000 रुपये शाम तककनाट प्लेस में रीगल सिनेमा के पास लेकर आने के लिए कहा। 
अधिकारी से सौदा तय होते ही मुकेश ने एंटी करप्शन ब्रांच को कंप्लेंट कर दी। इस सूचना पर एंटी करप्शन ब्रांचने अधिकारी को गिरफ्तार करने के लिए इंस्पेक्टर सुंदर देव सहित अन्य पुलिसकर्मियों की टीम बनाई। 16 जुलाई2004 की शाम शरद कुमार ने मुकेश से जैसे ही रिश्वत की रकम ली उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।उसके कब्जे से रिश्वत की रकम के रूप मंे 500 रुपये के 40 नोट भी बरामद हो गए। एंटी करप्शन ब्रांच ने उसकेखिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। सरकारी पक्ष ने आरोपसाबित करने के लिए 14 गवाहों को अदालत मंे पेश किया। अदालत ने गवाहांे के बयान और सरकारी पक्ष कीदलीलों को सुनने के बाद शरद कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा -7 और धारा -12 (2) के तहतदोषी करार देते हुए दोनों धाराओं में ढाई - ढाई साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी अधिकारी पर 20,000 रुपये का जुर्माना किया।-नवभारत टाइम्स, 20 Dec 2011, 0400 hrs IST,

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