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Friday, December 23, 2011

आधे से ज्यादा भारत घूस देने को मजबूर!

भारत के आधे से ज्यादा लोगों को काम निकालने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है. कानूनी तौर पर जो उनका हक था, उसे पाने के लिए उन्हें गैरकानूनी तौर पर अफसरों की जेब गर्म करनी पड़ी. ताजा आंकड़े दक्षिण एशिया की हालत खराब बताते हैं.

जर्मनी की राजधानी बर्लिन स्थित ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की ताजा सर्वे में इस बात का खुलासा किया गया है. काठमांडू में जारी आंकड़ों में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में घूस और रिश्वतखोरी इतनी आम बात हो गई है कि अफ्रीका के सहारा प्रायद्वीप के बाद यह इलाका दुनिया के सबसे भ्रष्ट इलाके में शामिल हो गया है.

ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और मालदीव के लगभग 7800 लोगों का इंटरव्यू और सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है. उनका कहना है कि इनमें से लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को रिश्वत देनी पड़ी. सभी जगहों पर सबसे ज्यादा घूस पुलिसवालों ने ली. भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के दो तिहाई लोगों का कहना है कि उन्हें भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की मुट्ठी गर्म करनी पड़ी.

54 प्रतिशत घूस देने वाले
जहां तक भारत का सवाल है, यहां के लगभग 54 प्रतिशत लोगों को रिश्वत देकर अपना काम कराना पड़ रहा है. उनका मानना है कि उनकी सरकार जनता के लिए सही कदम नहीं उठा रही है. उन्हें जन्म प्रमाणपत्र से लेकर ठेके तक के लिए पहले रिश्वत देनी पड़ रही है. भारत में हाल के दिनों में भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी की सोच में थोड़ी बहुत बदलाव देखी गई है. इसी मुद्दे पर भारत के समाजसेवी अन्ना हजारे अनशन कर रहे हैं. और इसी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय संसद में लोकपाल बिल पेश किया गया है.

भारत में ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक अनुपमा झा का कहना है, "लोगों को अहसास हो गया है कि भ्रष्टाचार पर काबू पाने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है. यहां हर स्तर पर भ्रष्टाचार है."

झा ने कहा, "यह रिपोर्ट बताती है कि लोग नेताओं, पुलिस और विधायिका के बारे में क्या सोचते हैं. लोगों का विश्वास उन पर से खत्म हो चुका है. लेकिन फिर भी मुझे उम्मीद है कि अगर लोगों ने हाथ मिला लिया तो भारत में बदलाव आ सकता है."

रिश्वत से आजिज
ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट को जारी करते हुए ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की रुकसाना नानायक्कारा ने कहा, "रिश्वत देते देते लोग आजिज आ चुके हैं. यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है. वे सरकारी अफसरों के रुतबे को देख कर भी आजिज आ चुके हैं." इस सर्वे का नाम है, "डेली लाइव्स एंड करप्शनः पब्लिक ओपीनियन इन साउथ एशिया." इसमें हिस्सा लेने वाले करीब 62 फीसदी लोगों का मानना है कि पिछले तीन साल में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले बहुत बढ़ गए हैं.

इस मामले में भारत और पाकिस्तान के लोग बेहद निराशा में हैं. हालांकि अब 80 फीसदी से ज्यादा लोगों का कहना है कि वे भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कार्रवाई करने को तैयार हैं. नानायक्कारा ने कहा, "सरकारों सावधान. जनता समझती है कि भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और वे इसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार हो रही है. साल 2011 में आम लोगों ने खड़े होकर इसका विरोध किया है और अपनी बात सामने रख दी है. उन लोगों की भावनाओं का ख्याल रखा जाना जरूरी है."

हाल ही में ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्ट देशों की सूची जारी की थी, जिसमें इन सभी छह देशों की स्थिति बेहद खराब है. 186 देशों की सूची में उन्हें 86 से लेकर 154वें स्थान पर रखा गया है. इस मामले में सबसे खराब हालत बांग्लादेश की है, जहां 66 प्रतिशत लोगों को सरकारी संस्थानों को पैसा खिलाना पड़ रहा है. उन्हें ज्यादातर ऐसे मामलों के लिए पैसे देने पड़ रहे हैं, जिसके वे कानूनी तौर पर हकदार हैं.
स्त्रोत : आधे से ज्यादा भारत घूस देने को मजबूर! DW-WORLD.DE, 23.12.2011 रिपोर्टः एएफपी/ए जमाल, संपादनः महेश झा

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