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Thursday, November 17, 2011

रिश्वत लेते सीडीपीओ, उप निदेशक (उद्यान) और एएनएम गिरफ्तार!


रिश्वत लेने के आरोप में सीडीपीओ गिरफ्तार
हरिद्वार में राज्य सतर्कता विभाग ने एक बाल विकास परियोजना अधिकारी को कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है.    
हरिद्वार जिले के रूड़की शहर में राज्य सतर्कता विभाग ने एक बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) को कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है.
पुलिस ने बताया कि मीना शाह को उनके घर से तब गिरफ्तार कर लिया गया जब वह नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से ‘पहली किस्त’ के तौर पर 10,000 रुपए स्वीकार कर रहे थे.
मीना ने प्रवीण नामक युवक को आंगनबाड़ी विभाग में नौकरी दिलाने का वादा किया था. नियुक्ति के लिए कथित तौर पर उन्होंने 60,000 रुपए की मांग की थी. स्त्रोत : समय लाइव.कॉम ०४.११.११
उप निदेशक (उद्यान) रिश्वत लेते गिरफ्तार
चित्तौडग़ढ़। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की चित्तौडग़ढ़ इकाई द्वारा उदयपुर में उप निदेशक (उद्यान) के पद पर कार्यरत मनोहर लाल तुषावड़ा को सहायक निदेशक (उद्यान) से विभिन्न पत्रावलियों का अनुमोदन करवाने के एवज में १० हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए सॢकट हाउस में रंगें हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। जानकारी के अनुसार, गत कई समय से यहां सहायक निदेशक (उद्यान) अजय ङ्क्षसह शेखावत के समक्ष ट्रेक्टर अनुदान की तीन एवं सामुदायिक जल स्त्रोत की चार पत्रावलियां निस्तारण के लिए लम्बित चल रही थी। जिले के विभिन्न काश्तकारों की ओर से यह पत्रावलियां स्वीकृति के लिए प्रस्तुत कर रखी थी। इस योजना के तहत सम्बन्धित काश्तकार को अनुदान के रूप में एक बड़ी राशि की छूट मिलती है। बताया जाता है कि इन पत्रावलियों की स्वीकृति देने के लिए एक टीम गठित की हुई है, जिसके द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन आदि करने के पश्चात इन पत्रावलियों की स्वीकृति प्रदान की जाती है। इस टीम में सहायक निदेशक (उद्यान) अजयङ्क्षसह शेखावत के साथ ही उप निदेशक (उद्यान) मनोहरलाल तुषावड़ा एवं कृषि अधिकारी शामिल है। जानकारी के अनुसार, इन पत्रावलियों पर तुषावड़ा को छोड़ कर अन्य (शेष पृष्ठ ८ पर) दो सदस्यों ने हस्ताक्षर कर स्वीकृति प्रदान कर दी थी लेकिन तुषावड़ा द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए जा रहे थे। गत माह भी चित्तौडग़ढ़ आने के दौरान उन्होंने इन पत्रावलियों पर हस्ताक्षर करने में आनाकानी की। बताया जाता है कि तुषावड़ा बुधवार को उदयपुर से एक अनुबन्धित टैक्सी कार से चित्तौडग़ढ़ पहुंचे एवं यहां स्थित सॢकट हाउस के कमरा नं. १० में रूकने के पश्चात बुधवार को रावतभाटा गए। गुरूवार को उन्हें राशमी जाना था। राशमी जाने से पूर्व सहायक निदेशक अजयङ्क्षसह शेखावत ने लम्बित सातों पत्रावलियों पर हस्ताक्षर करने का आग्रह करते हुए कहा कि सम्बन्धित काश्तकार गत कई दिनों से कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं एवं हस्ताक्षर के अभाव में अनुदान जारी नहीं किया जा रहा है। इस पर तुषावड़ा ने इन पत्रावलियों की स्वीकृति प्रदान करने के लिए बतौर रिश्वत जब १५ हजार रूपए की मांग की तो शेखावत ने कहा कि गरीब काश्तकार से यह राशि लेना उचित नहीं होगा। इस पर उप निदेशक ने इन योजनाओं पर दिए जाने वाले अनुदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अच्छा खासा अनुदान दिया जा रहा है तो इसकी भरपाई इसमें से कर ली जाए। उप निदेशक द्वारा अपने ही विभाग के अधिकारी से इस कार्य के लिए रिश्वत मांगे जाने पर शेखावत ने ५ हजार रूपए की राशि उन्हें सॢकट हाउस में दे दी एवं शेष राशि का इंतजाम कुछ देर में करने को कहा। बाद में इस आशय की जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्थानीय इकाई के कार्यवाहक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एस.एल. पंवार को दे दी। इस शिकायत का सत्यापन किए जाने के बाद उप निदेशक के खिलाफ जाल बिछाया गया। बताया जाता है कि शेखावत जब पुन: बकाया राशि देने सॢकट हाउस पहुंचे तो उप निदेशक को १० हजार रूपए की रिश्वत देते ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्थानीय इकाई ने उन्हें रंगें हाथों दबोच लिया। इस कार्यवाही के दौरान ब्यूरो की टीम में किशोर ङ्क्षसह, भारत ङ्क्षसह, रमेशचन्द्र, दलपत ङ्क्षसह, श्रवण कुमार, शेर ङ्क्षसह आदि शामिल थे। ब्यूरो की टीम के अचानक धावा बोलते ही उप निदेशक के होश उड़ गए जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना की जानकारी ब्यूरो के उप महानिरीक्षक टी.सी. डामोर को आदि को ब्यूरो के स्थानीय अधिकारी द्वारा दी गई, जिनके निर्देश पर बाद में तुषावड़ा के उदयपुर में विश्वविद्यालय मार्ग पर स्थित सुरभि बिहार में न्यू केशव नगर में उनके निवास की भी ब्यूरो की उदयपुर टीम द्वारा तलाशी ली गई। तुषावड़ा लगभग दो वर्ष से इस पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। इस कार्यवाही के दौरान मीडिया के सॢकट हाउस पहुंच जाने पर काफी देर तक उप निदेशक अपना चेहरा छिपाने में लगे रहे। चित्तौडग़ढ़। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की गई कार्यवाही के दौरान रिश्वत लेते दबोचे गए उप निदेशक (गोले में)। स्त्रोत : प्रात: काल, ०४.११.११
आठ सौ रूपए घूस लेते एएनएम गिरफ्तार
उदयपुर । भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बुधवार को मैथुड़ी (सलूम्बर) उपस्वास्थ्य केन्द्र की एएनएम को आठ सौ रूपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। एएनएम ने यह राशि जननी सुरक्षा योजना के चेक भुगतान के एवज में ली थी। ब्यूरो के उपमहानिरीक्षक टीसी डामोर ने बताया कि मैथुड़ी निवासी बंशीलाल मेघवाल 6 अक्टूबर को पत्नी नारायणीदेवी को प्रसव के लिए उपस्वास्थ्य केन्द्र लेकर आया था। उसी दिन प्रसव हो गया तथा शाम को उसे छुट्टी भी दे दी। 
सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर मिलने वाली जननी सुरक्षा योजना की राशि लेने के लिए बंशीलाल एएनएम रंजना (33) पत्नी ओमप्रकाश मेवाड़ा से मिला तो उसने पहले टालमटोल किया। बाद में आठ सौ रूपए रिश्वत मांगी। बंशीलाल ने इसकी शिकायत ब्यूरो को की। एएसपी राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने सत्यापन कार्रवाई की तब भी एएनएम नहीं मानी और कहा कि वह चाहे जिसे कह दे, राशि तो उसे देनी ही पड़ेगी। पुष्टि के बाद उप अधीक्षक विजेन्द्र व्यास के नेतृत्व में टीम ने एएनएम को उपस्वास्थ्य केन्द्र में आवास पर धरदबोचा। उसने रिश्वत की यह राशि टेबल के अंदर रख दी थी। गांधी चौक सलूम्बर निवासी रंजना उपस्वास्थ्य केन्द्र पर चार वर्ष से कार्यरत है। उसका ससुराल आलेड़ा (झालावाड़) में है। 
एएनएम रंजना ने रिश्वत के आठ सौ रूपए लेने के बावजूद परिवादी बंशीलाल को 1400 रूपए का ही चेक दिया जबकि सरकार की ओर से गर्भवती महिला को 1700 रूपए का चेक देने का प्रावधान है। पूछताछ में रंजना ने बताया कि मरीज को यहां वाहन से लाने के लिए तीन सौ रूपए आशा सहयोगिनी को देने के लिए रखे थे जबकि मरीज को उसका पति व सास स्वयं अस्पताल लेकर आए थे। प्रसाविका ने आशा सहयोगिनी भगवती पाण्डे के नाम से तीन सौ रूपए रिकार्ड में भी चढ़ा रखे थे। ब्यूरो ने इस रिकार्ड को भी जब्त किया है। स्त्रोत : प्रेस नोट . इन ०३.११.११

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